440hz & 432hz ..... मंत्र एवं षड्यंत्र


 

इस पार्थिव लोक के सभी मनुष्यों को 440hz की ध्वनि और तरंगों पर लयबद्ध कर दिया गया है और ये पिछले सौ वर्षों में ये स्पंदन इतना बढ़ा दिया गया है कि मनुष्य ऊर्जा क्रम में सबसे नीचे के स्तर पर लाए जा चुके हैं, चाहे वो बहु प्रचलित संगीत की ध्वनि हो जोकि किसी भी माध्यम से कानों में जा रही हो, या मोबाइल टॉवर से हो रहा दूषित तरंगों का संचार जोकि वायु में स्थित प्राण कणों को विखंडित करता है या फिर 440hz पर लयबद्ध मनुष्यों की वाणी जोकि केवल कलह, द्वेष, दूसरों की बुराई और भय फैलाने के लिए कार्य करती है.....
"440hz से लयबद्ध मनुष्य एक दूसरे के लिए भी षड्यंत्र ही रचते हैं और 432hz से स्वयं भागना और दूसरों को भी उसके विरूद्ध खड़ा करने का ही काम करते हैं....."
परंतु इस समय अधिकतम मनुष्य 440hz पर पूर्णतः बंध चुके हैं और उन्हें ये पता भी नहीं चला, ये उनके साथ ये षड्यंत्र कब और कैसे किया गया क्योंकि ध्वनि और तरंगें दिखाई नहीं देती..... इसीलिए मनुष्य प्रकृति और पुरुष दोनों से टूट चुके हैं और आज के मनुष्य जो भी बोलेंगे वे केवल और केवल उन्हें अधोगति ही प्रदान करेगा, क्योंकि यही तो ये शासक चाहते हैं कि मनुष्य यहां भी और देहांत उपरांत भी इनके ही दासत्व में रहें और उसके बदले में उन्होंने मनुष्यों को यहाँ की सुख सुविधाएं दी हैं, अपनी सेवाएं उपलब्ध कराई हैं.....
जब मनुष्यों ने उनकी सेवाएं ली हैं और उन्ही की ध्वनि पर भी बंध चुके हैं तो जो जिसके साथ लय में होगा वह उसी के लोक की ओर गति प्राप्त करेगा..... जो जिसका श्रवण करेगा, वह उसी की ध्वनि से लयबद्ध होगा और वैसी ही गति को प्राप्त होगा.....
पार्थिव मनुष्यों के पास कुछ समय बाकी है कि वह अपनी जीवन शैली में तुरंत ध्वन्यात्मक परिवर्तन लाएं, जीवन शाली को सरल करें, अपनी आहार, व्यवहार और अपनी वाणी को सही करें, शुद्ध करें, वही सहायक होगा.....
जैसे स्वयं का खाया भोजन ही स्वयं की देह को ऊर्जावान बनाता है, उसी तरह स्वयं द्वारा किया नियम ही स्वयं को आने वाले काल से कवच प्रदान करेगा.....
बाकी जिसकी जैसी इच्छा, जिसका जैसा चुनाव.....

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